नए साल में, नया क्या?
नए साल में, नया क्या?
आज एक जनवरी 2022 है। आज अंग्रेजी कैलेंडर के नव वर्ष का पहला दिन है। पूरे विश्व में लोग आज ही के दिन सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं। परंतु एक प्रश्न हर वर्ष मेरे मस्तिष्क में रहता है, कि नए वर्ष में नया क्या है, जो लोग सभी को शुभकामनाएं देते हैं। आमतौर पर नया तो कुछ भी नहीं होता, सिर्फ दिन और तारीख ही बदलती है। लोगों का जीवन जैसे चल रहा होता है, वैसे ही चलता रहता है। हां। बस एक नई उम्मीद होती है कि शायद अग्रिम वर्ष, पूर्व वर्ष से अच्छा होगा और आने वाले दिन अच्छे से बीतेगें। इसी उम्मीद में लोग एक दूसरे को शायद शुभकामनाएं देते हैं। वैसे तो सभी के जीवन में समस्याएं व परेशानियां रहती ही हैं और उन परेशानियों का दर्द सभी को खुद ही झेलना पड़ता है। परंतु लाख परेशानी के बाद भी जब कोई पूछता है कि कैसे हो। सब ठीक तो है ना। तो जवाब में यही कहना पड़ता है कि हां सब ठीक है। सब बढ़िया है। जीवन में कुछ भी बढ़िया नहीं होने के बावजूद भी अधिकांश लोग चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लेकर यही जवाब देते हैं। प्रत्येक वर्ष लोग इसी उम्मीद में रहते हैं, कि आने वाला वर्ष अच्छा होगा। इस अच्छे वर्ष की उम्मीद में एक-एक वर्ष करके जिंदगी के कई वर्ष बीत जाते हैं और जिंदगी एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच जाती है कि लोग नव वर्ष के अच्छा होने की उम्मीद छोड़ देते हैं। यह जीवन चक्र ऐसे ही उम्मीदों पर चलता रहता है। ऐसा नहीं है कि लोगों की उम्मीदें पूरी नहीं होती। उम्मीदें पूरी तो होती है, परंतु एक उम्मीद पूरी होने से पहले ही मनुष्य दूसरी उम्मीद मन में बिठा लेता है और जीवन भर यही सोचता रहता है कि मेरी उम्मीद कभी पूरी नहीं होती।
प्रवेश पांडेय
Very true sir.....
ReplyDeleteHope always prevails.
Correct
ReplyDeleteसर एक एक शब्द सत्य है। हम सभी शायद इसी मनःस्थिति से गुजर रहे हैं और फिर भी वह जताने का प्रयास करते हैं जो वास्तव में है नहीं ।फिर भी कुछ अच्छा होने की उम्मीद ही वर्तमान स्थिति से जूझने का साहस देती रहती है ।
ReplyDeleteAbsolutely correct
ReplyDeleteWe have always held to the hope,the belief,the conviction that there is a better life ,a better world, beyond the horizon.
तृष्णा न जीर्णा वयमेव जीर्णा
ReplyDeleteकालो न यातो वयमेव यात:।
पुनरपि अस्माकीयमेव कामना परमात्मना-
सर्वे भवन्तु सुखिन:सर्वे सन्तु निरामया:
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दु:खभाग्भवेत्।।इति ।।