राम का धैर्य
राम का धैर्य धैर्य का अर्थ है विपरीत परिस्थितियों में अपने आप पर काबू रखना। विपत्ति के समय व्याकुल ना होना अथवा प्रतिकूल परिस्थितियों के होने पर भी स्वयं की मनोदशा पर नियंत्रण रखना। वर्तमान समय में मनुष्य में यदि किसी गुण का सबसे अधिक ह्रास हुआ है, तो वह है धैर्य। आज के युग में मनुष्य का धैर्य, पूर्ण रूप से समाप्त हो चुका है। आए दिन समाचार पत्रों के माध्यम से सुनने व पढ़ने को मिलता है, कि छोटी-छोटी बातों पर आपसी झगड़े हो गए अथवा किसी एक ने दूसरे की हत्या कर दी। यहां तक की गाड़ी की पार्किंग जैसी छोटी-छोटी बातों पर लोग आपस में लड़ लेते हैं। कार्यस्थल पर अथवा परिवार के अंदर भी छोटी-छोटी बातों को लेकर मनमुटाव हो जाता है। कभी-कभी यह मनमुटाव बड़े झगड़े का रूप ले लेता है। ऐसे में हमें जरूरत है की धैर्य को कैसे काबू रखना है, इसके बारे में जाने और सीखें। भगवान राम के धैर्य के बारे में पढ़ना वह उसे अपने जीवन में उतारना एक अच्छा कदम हो सकता है। राम ने अपने जीवन में आने वाली प्रत्येक विपरीत परिस्थिति का किस तरह धैर्यता पूर्वक सामना किया यह किसी से छुपा नहीं है। यदि हम राम के जीवन पर नजर डालें तो प...