वेदों पर संक्षिप्त व्याख्यान
सियाराम मय सब जग जानी, करहु प्रणाम जोरी जुग पानी। मंदिर में उपस्थित सभी महानुभावों को मेरा प्रणाम। आज मुझे दिल्ली पूर्वांचल समिति के इस मंच पर वेदों के महत्व केविषय में संक्षिप्त प्रकाश डालने के लिए कहा गया है। वैसे तो मेरे द्वारा वेदों के विषय में कुछ कहना सूर्य को दीया दिखाने के बराबर है। बात करते हैं वेद के शाब्दिक अर्थ कि, वेद शब्द संस्कृत धातु विद् से बना है जिसका अर्थ है जानना या ज्ञान प्राप्त करना। अतः वेद का शाब्दिक अर्थ है ज्ञान या परम सत्य का ज्ञान। वेदों को लेकर सबके मन में यह जिज्ञासा बनी रहती है की वेद कितने पुराने है और किसने लिखे है। वेदों के बारे में हम कह सकते हैं कि वेद मानव सभ्यता का सबसे प्राचीन ग्रंथ है और यह पृथ्वी पर सृष्टि के प्रारंभ से ही है। इस सृष्टि की उत्पत्ति करीब एक अरब 96 करोड़ 53000 वर्ष पूर्व हुई थी। अर्थात् वेद भी लगभग इतने ही प्राचीन है। वेदों को अपौरुषेय कहा जाता है, अर्थात् वेद की रचना किसी मनुष्य ने नहीं की है। सृष्टि के प्रारंभ में ऋषियों और मुनियों ने अपने तप और साधना के बल पर, ईश्वर से श्रुति अर्थात सुनने के माध्यम से प्राप्त किया। फ...