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Showing posts from January, 2021

क्या हम मनुष्य हैं?

क्या हम मनुष्य हैं? क्या हम मनुष्य हैं? क्या आज के समाज का प्रत्येक स्त्री पुरुष मनुष्य कहलाने के योग्य है? क्या हम मनुष्यता का धर्म भूल चुके हैं? क्या वाकई हमारा व्यवहार मनुष्यों जैसा है? क्या ईश्वर या सृष्टि ने हमारे लिए ऐसा ही व्यवहार सुनिश्चित किया था? क्या इस पूरी सृष्टि पर केवल मनुष्यों का अधिकार है? क्या सृष्टि के समस्त जीव जंतु मनुष्यों के आधीन है? अभी हाल ही में बर्ड फ्लू नामक बीमारी ने भारत में दस्तक दी। यह बीमारी पक्षियों में एक प्रकार का संक्रमण है। जो एक पक्षी से दूसरे पक्षी में फैलता है। यह बीमारी पक्षियों से मनुष्यों में भी कुछ हद तक फैल सकती है। इसी बीमारी के चलते कई राज्यों में हजारों निर्दोष पक्षियों की हत्या कर दी गई, ताकि यह बीमारी मनुष्यों में ना फैले। बिना उन सभी पक्षियों की जांच किए कि उन्हें फ्लू है भी या नहीं, केवल आशंका के आधार पर उनकी हत्या कर दी गई। कुछ लोग अपने तर्क से इसे सही ठहरा सकते हैं, परंतु मेरे विचार से यह सरासर गलत है। अन्याय है और यह कदम मनुष्य की दुष्ट मानसिकता को दर्शाता है। जहां तक एक तरफ कोरोना संक्रमण के बचाव के लिए अनेकों उपाय किए गए। कोरोना...

कर्तव्य और अधिकार

कर्तव्य और अधिकार  मुझे मेरे सारे अधिकार चाहिए पर कोई मुझे मेरे कर्तव्य ना ही याद दिलाएं तो बेहतर। वर्तमान समय में ज्यादातर लोगों की यही कहानी है। कर्तव्य और अधिकार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जो कार्य किसी के लिए अधिकार है, वही कार्य किसी दूसरे के लिए कर्तव्य। जैसे शिक्षा प्राप्त करना बच्चों का अधिकार है, तो वहीं शिक्षा देना शिक्षक का कर्तव्य है। यदि शिक्षक अपने कर्तव्य का निर्वाह अच्छे से करें, तो छात्रों को कभी भी अपने अधिकार के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर यदि शिक्षक के अधिकारों की बात करें, तो यदि शिक्षक से ऊपर बैठे अधिकारीगण अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करें, तो शिक्षक को अपने अधिकारों की कभी चिंता नहीं होगी। यह मात्र एक उदाहरण है अपनी बात को रखने का कृपया इसे अन्यथा ना लें। जीवन एक संघर्ष है और ज्यादातर लोग यह संघर्ष अपने अधिकारों की मांग करने या उसके बारे में बात करके ही निकाल देते हैं। भारत देश की परिस्थितियां भी कुछ ऐसी ही है। यहां आए दिन कोई न कोई अपने अधिकारों की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन करने लग जाता है। लेकिन इन प्रदर्शनों से होने वाली आम जनता...

नया साल

                     नया साल नया साल आएगा, पुराना चला जाएगा। तू जैसे जीता आया है, वैसे ही जीता जाएगा।। साल बदल जाएगा और दिन भी बदल जाएगा। पर तेरी दिनचर्या में, ना कोई बदलाव आएगा।। कैलेंडर बदल जाएगा और नया कैलेंडर आएगा। पर तेरा सुख-दुख जैसा है, वैसा ही रह जाएगा।। नया साल मुबारक हो, तू सबको कहता जाएगा। पर तेरी जरूरत पड़ने पर, कोई ना काम आएगा।। नए साल पर प्रण ले, तू और मेहनती बन जाएगा।। और अगले नए साल तक, कुछ अच्छा करके दिखाएगा।। नए साल पर शपथ ले, तू सबके काम आएगा।। परिवार तथा समाज में, अपनी अलग पहचान बनाएगा।। नए साल पर प्रतिज्ञा कर, तू कुछ ऐसा कर जाएगा। कि संसार से जाने के बाद भी, सब के दिलों में बस जाएगा।। प्रवेश पांडेय