ऑक्सीजन की कीमत

ऑक्सीजन की कीमत
ऑक्सीजन। जिसे हम प्राणवायु भी कह सकते हैं। एक ऐसी वायु जो मनुष्य ही नहीं बल्कि सभी प्राणियों के जीवन का आधार है। प्रकृति ने यह वायु हमें प्रचुर मात्रा में यूं ही दे रखी है। जिसके बदले में प्रकृति हमसे कुछ नहीं मांगती। आमतौर पर यह वायु हमें वृक्षों से प्राप्त होती है और वृक्ष प्रकृति का और इस सृष्टि का केंद्र बिंदु हैं। यदि हम यह कहें कि मनुष्य और वृक्ष एक दूसरे के पूरक हैं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। यह सब जानते हुए भी मनुष्य ने प्रगति के नाम पर बार-बार प्रकृति का दोहन किया है और वृक्षों को काटा है। वर्तमान स्थिति यह है कि, आज देश में ऑक्सीजन को लेकर त्राहि मची हुई है। ऑक्सीजन ना मिल पाने की वजह से कई लोगों की जाने जा रही हैं। कोरोना महामारी के चलते ऑक्सीजन की मांग में जबरदस्त वृद्धि हुई है, जिसकी आपूर्ति सही प्रकार से नहीं हो पा रही है। अब शायद लोगों को ऑक्सीजन की कीमत समझ आ रही होगी। वर्तमान में भारत की वायु गुणवत्ता किसी से छुपी नहीं है। देश के हर छोटे-बड़े शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब श्रेणी में है। आने वाले समय में यदि सरकारों ने इसका उपाय नहीं किया, तो वह दिन दूर नहीं जब लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर साथ लेकर चलना पड़ेगा। अभी जो हालात महामारी की वजह से हैं, कहीं ऐसे हालात आमतौर पर ना हो जाएं। हमें वृक्षों की कीमत को समझना चाहिए और प्रगति के नाम पर हो रही वृक्षों की कटाई को रोकना चाहिए। सरकार एक वृक्ष को काटने के नाम पर 10 पौधे लगा देती है। लेकिन ना तो उन 10 पौधों की सही से देखभाल हो पाती है और ना ही वे पौधे वृक्ष बन पाते हैं। यदि उनमें से कुछ पौधे वृक्ष बन भी जाएं, तो भी उन्हें 15 से 20 साल का समय लग जाता है। एक वृक्ष की क्षतिपूर्ति पौधा लगाकर नहीं की जा सकती। समय आ गया है कि हम वर्तमान से सबक लें और अपना भविष्य तय करें। 

प्रवेश पांडेय

Comments

  1. Makes very much sense ... i agree to the prospect and the points mentioned above ...

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  2. A very serious point mentioned above and we can't deny the fact that all this is because of us only.....

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