मंगल यात्रा

मंगल यात्रा
अभी हाल ही में दिनांक 18 फरवरी 2021 को नासा के परसीवरेंस रोवर ने मंगल की धरती पर कदम रखा। नासा ने इस रोवर को मंगल की धरती पर जीवन की खोज करने के लिए भेजा है। अभी दिनांक 4 मार्च 2021 को रोवर ने मंगल की सतह पर करीब 6.5 मीटर की दूरी तय की। नासा का यह अभियान मंगल पर जीवन को तलाशने की ओर एक छोटा सा कदम मात्र है। भारत ने भी वर्ष 2014 में मंगल मिशन के तहत मंगलयान को मंगल की कक्षा में स्थापित किया था। अभी तक विश्व की 4 स्पेस एजेंसियां मंगल पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी है। अपने निरंतर प्रयासों से विभिन्न स्पेस एजेंसियां मंगल के बारे में जानकारियां जुटाने में लगी हुई है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि मंगल पर जीवन है या नहीं। 
प्रस्तुत लेख इस बात की खुशी को लेकर बिल्कुल नहीं है कि मनुष्य ने धरती से मंगल तक की यात्रा तय कर ली और मंगल पर जीवन की खोज में लगा है। बल्कि यह लेख इस बात को लेकर चिंता व्यक्त करने के लिए है कि मनुष्य ने ईश्वर की बनाई इस सृष्टि में आवश्यकता से अधिक दखल देना शुरू कर दिया है। ईश्वर ने मनुष्य को रहने के लिए पृथ्वी ग्रह दिया। जहां उसने रहने के अनुकूल सभी सुख सुविधाएं दी। परंतु मनुष्य ने विकास के नाम पर पृथ्वी का अतिदोहन किया और जिसकी वजह से पृथ्वी को काफी नुकसान हुआ है। विकास के नाम पर मनुष्य ने पृथ्वी को इस मोड़ पर ला दिया है कि ना तो आज पृथ्वी पर सांस लेने के लिए शुद्ध वायु है। और ना ही पीने के लिए शुद्ध जल। अब मनुष्य ने अपनी विस्तारवादी सोच को इतना बड़ा कर लिया है कि वह पृथ्वी से बाहर निकलकर अन्य ग्रहों पर दख़ल देने लगा है। वैसे एक चीज मेरी समझ से परे है कि हम मंगल पर जीवन की खोज करना क्यों चाहते हैं। यदि हम करोड़ो रुपए खर्च करके मंगल के विषय में थोड़ी बहुत जानकारी हासिल भी कर लेंगे तो उससे क्या लाभ होगा।
 इन सब विषयों का एक दूसरा पक्ष भी है। हम एक मशीन के माध्यम से जो महज कुछ मीटर तक ही चल सकती है, यह कैसे पता लगा सकते हैं कि मंगल पर जीवन है या नहीं। क्या पता मंगल पर जीवन हो और वहां भी जीवो का निवास हो। वैज्ञानिक ऐसा सोचते ही क्यों हैं कि मंगल पर जीवन नहीं है और हमें उसे खोजना है। 
वैज्ञानिक पृथ्वी पर जीवन के आधार पर मंगल पर जीवन की खोज में लगा है। परंतु ऐसा भी तो हो सकता है कि मंगल पर ऐसे जीव हो जिन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता ही ना हो। वरन वह किसी और माध्यम से जीवित रहते हो। जब मनुष्य ऐसे वाहन बना सकता है जो अलग-अलग ईंधन से चल सकते हैं। तो क्या ईश्वर अलग-अलग ईंधन से चलने वाले जीवो को नहीं बना सकता। हमने अपनी सोच को सीमित क्यों रखा हुआ है कि केवल ऑक्सीजन ही जीवन का आधार है। ईश्वर द्वारा रचित इस सृष्टि  के बारे में पृथ्वी पर रहने वाले वैज्ञानिक मात्र कुछ ही जानकारियां जुटा पाए हैं और स्वयं को श्रेष्ठ समझने लगे हैं। 
मान लीजिए किसी अन्य ग्रह से पृथ्वी पर जीवन की खोज के लिए किसी यान को भेजा जाए और वह यान अंटार्कटिका महाद्वीप पर उतरे। साधारण सी बात है अंटार्टिका में उतरने के बाद पृथ्वी के बारे में यान यही जानकारी देगा कि पृथ्वी पर केवल बर्फ है और कुछ नहीं। परंतु वास्तविकता इससे परे है। इसी प्रकार मंगल के एक छोटे से हिस्से से प्राप्त जानकारी के आधार पर मंगल के विषय में निर्णय लेना सही नहीं। मनुष्य को अन्य ग्रहों में दखल देने की बजाय पृथ्वी को कैसे उसके वास्तविक स्वरूप में बनाए रखा जाए इस पर विचार करना चाहिए।

प्रवेश पांडेय

Comments

  1. अत्युत्तम लेख भ्राता जी

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