क्या हम मनुष्य हैं?

क्या हम मनुष्य हैं?
क्या हम मनुष्य हैं? क्या आज के समाज का प्रत्येक स्त्री पुरुष मनुष्य कहलाने के योग्य है? क्या हम मनुष्यता का धर्म भूल चुके हैं? क्या वाकई हमारा व्यवहार मनुष्यों जैसा है? क्या ईश्वर या सृष्टि ने हमारे लिए ऐसा ही व्यवहार सुनिश्चित किया था? क्या इस पूरी सृष्टि पर केवल मनुष्यों का अधिकार है? क्या सृष्टि के समस्त जीव जंतु मनुष्यों के आधीन है? अभी हाल ही में बर्ड फ्लू नामक बीमारी ने भारत में दस्तक दी। यह बीमारी पक्षियों में एक प्रकार का संक्रमण है। जो एक पक्षी से दूसरे पक्षी में फैलता है। यह बीमारी पक्षियों से मनुष्यों में भी कुछ हद तक फैल सकती है। इसी बीमारी के चलते कई राज्यों में हजारों निर्दोष पक्षियों की हत्या कर दी गई, ताकि यह बीमारी मनुष्यों में ना फैले। बिना उन सभी पक्षियों की जांच किए कि उन्हें फ्लू है भी या नहीं, केवल आशंका के आधार पर उनकी हत्या कर दी गई। कुछ लोग अपने तर्क से इसे सही ठहरा सकते हैं, परंतु मेरे विचार से यह सरासर गलत है। अन्याय है और यह कदम मनुष्य की दुष्ट मानसिकता को दर्शाता है। जहां तक एक तरफ कोरोना संक्रमण के बचाव के लिए अनेकों उपाय किए गए। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लॉकडाउन जैसे कठोर निर्णय लिए गए ताकि मनुष्यों को बचाया जा सके। तो वहीं दूसरी ओर बिना कुछ सोचे समझे बर्ड फ्लू के डर से हजारों निर्दोष पक्षियों की हत्या कर दी जाती है। यह घटना यही दर्शाती है कि मनुष्य कितना स्वार्थी है। जब मनुष्यों में बीमारी फैली तो सैकड़ों जतन किए गए उसे रोकने के लिए और जब वैसी ही बीमारी पक्षियों में फैली तो हजारों निर्दोष पक्षियों की बिना सोचे समझे हत्या कर दी गई। ईश्वर मनुष्य को सद्बुद्धि दे। उन्हें इस चीज का ज्ञान दें कि यह सृष्टि सिर्फ मनुष्यों के लिए नहीं है। अपितु हर छोटे-बड़े जीव जंतु के लिए है। जितना अधिकार मनुष्यों का इस प्रकृति पर है, उतना ही अधिकार प्रत्येक जीव जंतु का इस पृथ्वी और प्रकृति पर है।
प्रवेश पांडेय

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